ना जाने क्यों ??

बहूत दिनों से देखा नहीँ तुमको ,तेरी तस्वीर दिल मैं लिय घूमता हूँ ।
ना जाने क्यों आवारा मैं आशिक किसी का लगता हूँ ॥
क्यों आय तेरी याद ,मैं किसे भागा करता हूँ ।
ना जाने क्यों आवारा मैं आशिक किसी का लगता हूँ ॥

हैं नफ़रत मोहोब्बत से ,पर मेरा दिल भी किसी पर फिदा हैं ।
ना जाने क्यों आवारा मैं आशिक किसी का लगता हूँ ॥
हैं ये बीमारी गम्भीर मुझे कमज़ोर ना करदे डरता हूँ ।
ना जाने क्यों आवारा मैं आशिक किसी का लगता हूँ ॥

मामूली सी पेहेचान मेरी ,औकात बदलना चाहता हूँ ।
ना जाने क्यों आवारा मैं आशिक किसी का लगता हूँ ॥
प्यार नहीँ निभाना आता तो क्या ?चाहा तूझी को करता हूँ ।
ना जाने क्यों आवारा मैं आशिक किसी का लगता हूँ ॥
-विक्रम जज्बाती(संदीप प्रसाद)