वक़्त ही तो है


वक़्त ही तो है, कट जाएगा
रात है अभी, कल सवेरा हो जाएगा
दुःख का बादल छाया है जो
हवा तो चलने दे, वो भी छट जाएगा
वक़्त ही तो है, कट जाएगा

निराश क्यों होता है तू
आस क्यों खोता है तू
अंत नही शुरुवात है अभी
सब्र तो रख, जो होना है हो ही जाएगा
वक़्त ही तो है, कट जाएगा

हार क्यों मानता है तू
असलियत नही जानता है तू
खेल ये किस्मत का है
भाग्य पर रोता है क्यों,
एक दिन वो भी खुल जाएगा
रात है अभी, कल सवेरा हो जाएगा
वक़्त ही तो है, कट जाएगा
20160913_142614
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5 Comments

  1. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 17/09/2016
  2. डॉ. विवेक Dr. Vivek Kumar 18/09/2016
  3. Saviakna Savita Verma 18/09/2016
  4. Kajalsoni 18/09/2016

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