औरत (मेरे पास चले आओ …)

औरत
मेरे पास चले आओ …..
जो दुखी तुम खुद से हो
फंसे हुए अँधेरे मे हो
आँखों में अगर नमी सी है
सांसो मैं भरी बेकरारी है
मेरे पास चले आओ ….

मैं तुझको आँचल में छुपा लूंगी
तेरी रज रज के बलाए लूंगी…
बसा लूंगी तुझे दिल मे
छुपा लूंगी इन पलकों मे
तेरे सपनो को सजाऊँगी
अपनी ममता को बिछाऊँगी
मैं तुझसे से चाहती हूँ बस इतना
मुझे अपने दिल मे सदा रखना
मुझे न चाहत है महलो की
तेरी शोहरत ,या पैसो की
जो तू फंस जाये बवंडर मे
इस दुनिया दारी के चक्कर मे
सुकून की साँसे तुझे मैं दूँगी ….

मेरे पास चले आओ ….

जब तेरे साथ न हो कोई
तेरी हंसी कही हो खोयी ..
फकत चंद लम्हे न तेरे हो
ये लंबे रास्ते अँधेरे हो …
मैं जुगनू बन के आऊँगी
तेरी दुनिया मैं छा जाऊंगी
तेरे हर लम्हे को संजो दूँगी
तेरे जीवन को महक दूँगी
तेरी आँखों की कहानी हूँ
तुझ संग जीने आयी हूँ .
तेरी पत्नी मुझे सब बोले …
मगर मैं तेरा साया हूँ …
तुझ मैं ही समया हूँ …..

मेरे पास चले आओ ….

मैं औरत हूँ , कहानी हूँ
आँखों से बहता पानी हूँ
न जानू किसी को ज़माने मैं
मेरी दुनिया है तेरे ही आशियाने में
मुझको प्यार देगा तो मुस्कुराऊंगी
हर पल तेरे संग बिताऊँगी…
माँ , बहिन , बीवी की तरह
तेरी दुनिया सजाओऊंगी …………
जो तू थक जायेगा कभी युही
बेटी बन के हर पल हँसाऊँगी

5 Comments

  1. babucm babucm 17/09/2016
  2. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 17/09/2016
  3. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 19/09/2016

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