मुक्तक-सरहद के सिपाही-शकुंतला तरार

(सरहद के सिपाही,कमांडो )

कहीं जाड़ों में अकड़े भूखे प्यासे हर ख़ुशी देदी,

जहां जन्मे हैं उस माटी को अपनी बंदगी देदी,

क़यामत कितने आए व्यर्थ न होगी इनकी कुर्बानी,

इन्होंने देश की रक्षा को अपनी ज़िंदगी देदी||

शकुंतला तरार  रायपुर (छत्तीसगढ़)

6 Comments

  1. babucm babucm 17/09/2016
  2. shakuntala tarar 17/09/2016
    • shakuntala tarar 18/09/2016
  3. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 17/09/2016
    • shakuntala tarar 18/09/2016

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