“सवाल-2”

कल बादल का एक छोटा सा टुकड़ा
बहती हवाओं के संग
पतझड़ के सूखे पत्ते की मानिन्द
मेरी छत पर आ गिरा
छुआ तो हल्के गीलेपन के साथ
रूह का सा अहसास था
रूह इसलिए…..,
क्योंकि वह दीखती कहाँ है ?
बस होने का अहसास भर देती है
सुनो……. !
तुम्हारी दुनियाँ में भी पतझड़ होता है ?
सुख-दुख , जीवन-मरण और पतझड
ये सब जीवन के साझी हैं
तुम……… ,
तुम भी नश्वर हो
फिर ये आदत कहाँ से लाए ?
अजर-अमर होने की .

“मीना भारद्वाज”  

16 Comments

  1. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 16/09/2016
    • Meena Bhardwaj Meena bhardwaj 16/09/2016
  2. mani mani 16/09/2016
    • Meena Bhardwaj Meena bhardwaj 16/09/2016
  3. babucm babucm 16/09/2016
    • Meena Bhardwaj Meena bhardwaj 16/09/2016
  4. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 16/09/2016
    • Meena Bhardwaj Meena bhardwaj 16/09/2016
  5. डॉ. विवेक Dr. Vivek Kumar 16/09/2016
    • Meena Bhardwaj Meena bhardwaj 16/09/2016
    • Meena Bhardwaj Meena bhardwaj 16/09/2016
  6. Kajalsoni 16/09/2016
  7. Meena Bhardwaj Meena bhardwaj 17/09/2016
  8. ALKA ALKA 23/09/2016
    • Meena Bhardwaj Meena Bhardwaj 23/09/2016

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