तू मुझे !!

उठता धुंआ सा, कभी बुझता दीया सा तू लगे है मुझे।
कल्पनाओं से परे, तो कभी दामन में मेरे तू लगे है मुझे। ।
भ्रमित करती मेरे सपनो की मरीचिका ,
कभी मेरे ख्वाब सा , कभी हकीकत सा तू लगे है मुझे।
गुमसुम समंदर सा , कभी ठहरा किनारा सा तू लगे है मुझे।
हौसलों की उड़ान भरता लहरों की मौज पे ,
कभी कटी पतंग सा , तो कभी साहिल पे डूबी कश्ती सा तू लगे है मुझे।
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शीतलेश थुल 

13 Comments

  1. mani mani 16/09/2016
    • शीतलेश थुल शीतलेश थुल 19/09/2016
  2. babucm babucm 16/09/2016
    • शीतलेश थुल शीतलेश थुल 19/09/2016
      • babucm babucm 19/09/2016
        • शीतलेश थुल शीतलेश थुल 19/09/2016
          • babucm babucm 19/09/2016
  3. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 16/09/2016
    • शीतलेश थुल शीतलेश थुल 19/09/2016
    • शीतलेश थुल शीतलेश थुल 19/09/2016
  4. Kajalsoni 16/09/2016
    • शीतलेश थुल शीतलेश थुल 19/09/2016

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