पी.सी.सी. की यादें …

पी.सी.सी. की यादें …

(नोट :- यह कविता लेखक के प्रशिक्षण के दौरान अनुभव एवं संस्‍मरण के आधार पर रचित है)

जून का महिना जेठ की गर्मी में दिया जोर का झटका
पी.सी.सी. के लिए सूर्यनगरी जोधपुर आर.पी.टी.सी. में पटका
आते ही यहां खाना खिलाकर भूमिप्रणाम धरती धकेल करवाया
बैचारा रोडवेज का कंडक्टर भी आर.ए.सी. वालों की चपेट में आया
एक शाम तो आर.पी.टी.सी. मैस ने ही हमें दिया निवाला
जगह की कमी से दईजर जी.आर.पी. लाईन में डेरा डाला
तपते पहाड लू की लपटें दूर-दूर तक वीरान
आपको यहीं प्रशिक्षण करना है मिला यह फरमान
उठते ही पीटी-परैड दोपहर में कानून की सिखलाई
आंख झपके गर्मी लगे, कैसे पार पडेगी मेरे भाई
हिम्मत की एक दूसरे को देखा, मन में धारी रीस
मंडलनाथ और बेरीगंगा के बीच तपे दीवान एक सौ बीस
समय सिंह‍ जी की पीटी और दौड ने चुस्त बनाया
जब्बसा ने भी परैड ग्राउण्ड का गुर सिखाया
चूनारामजी ने भी ‘समय-हुलिया-स्थान’ का मंत्र दिया
पी.सी. रहमान खां ने भी ‘बैच कमांडर’ का काम किया
सुबह शाम की कसरत दोपहर में कानूनी ज्ञान
रात्रि में नीलगगन के नीचे ही मिलता कुछ विश्राम
ग्राउण्ड में ही नहीं मैस फटीक कर पसीना बहाते
जंगल में भी मंगल कर दाल-रोटी शान से खाते
पडते-घुडते पसीने में लथपथ बीता जून महिना
इस भयंकर गर्मी ने मुश्किल कर दिया जीना
पेड-पौधों को पानी देते बजरी का भर लाते गाडा
इन्द्रदेव से प्रार्थना करते, भर जाए यह चूनानाडा
इन्द्रदेव ने सुनी पुकार बादल भी बरसाए
दईजर संग ‘एक सौ बीस’ प्राणी भी हरषाए
हर्षित मन भक्ति-भाव से किया मां का जगराता
प्रसाद पाकर मैया का हर कोई शीष नवाता
माह जुलाई बीत गया यूं ही खट्टी मीठी यादों से
अब कौन परिचित था सेन्टर वालों के इरादों से
एक अगस्त से आर.पी.टी.सी. परिसर में चलने का फरमान आया
कुछ हुए प्रसन्न कईयों के सिर पर छाई चिन्ता की छाया
नए स्थान में नए माहौल में कैसे पडेगी पार
जल्दी ही उतर गया दईजर लाईन का खुमार
सभी काम समय पर होते पर नींद नहीं होती पूरी
आर.पी.टी.सी. में आकर जैसे बढ गई आराम से दूरी
धीरे-धीरे ढले माहौल में कुछ तो चेहरे हरसे
हर्षित इन चेहरों को देख बादल भी खूब बरसे
बादल बरसे लगातार फिर भी आ गया अवकाश का अकाल
व्यथित जन चिन्तित हुए, कर लिया अपना बुरा हाल
छुट्टी के लिए भी कराने लगे सिफारिशी फोन
जिसका कोई आका नहीं वो बेचारा हो गया मौन
फिर संस्था प्रधान ने ही एक उंची सोच विचारी
जितनी बाकी थी छुट्टियां मंजूर कर दी सारी
अवकाश की खुमारी उतार सब लगे परीक्षा की आस में
समय तो यूं ही बीत रहा, झाडू. बाल्टी और घास में
आर.पी.टी.सी. में प्रशिक्षण का ऐसा माहौल बना सटीक
पी.टी. परैड इंडोर से भी बडी हो गई फटीक
इस्तगासों और फाइलों के चक्कर में जान झौंक दी सारी
दस्तावेज जमा कराकर कर ली मुक्ति की तैयारी
पढो लिखो तुम सब पढकर बन जाओ सफल दीवान
अपने साथी सहकर्मियों का भी करना तुम सम्मान
ये प्रशिक्षण के दिन यूं ही बीत जाएंगे
जब मिलेंगे कभी तो फिर से याद आएंगे
हंसी खुशी जीलो यह पल, भूल जाओ बीते कल को
आगामी की चिन्ता में, न खोना इस सुनहरे पल को
जीना सब जिन्दादिली से जीवन का पर्व मनाएं
आप सबको नवजीवन की हार्दिक शुभ कामनाएं

रामगोपाल सांखला ”गोपी”

2 Comments

  1. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 16/09/2016
    • Ram Gopal Sankhla Ram Gopal Sankhla 13/09/2017

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