हार-1….सी.एम्. शर्मा (बब्बू)….

कभी कभी हारने का मज़ा ही अपना होता है…..
दिल हारना…ज़िन्दगी हारनी…फिर जहां हारना….
ऐसे लगता जैसे हम जीत रहे हैं हार नहीं रहे….
कितना आसान सा…अपने आप सब होता है…
है ना….

अपने को हार रहे होते हैं हर पल….जब…
नींद कोसों दूर हो जाती है….
अपने आप हँसते हैं अपने आप ही रोते हैं…
अकेले ही बातें करते हैं…
बिना किसी सोच के समझ के…..
कितना यंत्रवत होता है….
सब अपने आप….
लोग पागल समझने लगते हैं….

पता नहीं यह सिलसिला हारने का…
कब से चल रहा है….
नहीं पता मुझे…
हाँ इतना पता है कि इस हार में…
अगर सिर्फ और सिर्फ हार ही होती…
तो सिलसिला कब का ख़तम हुआ होता…
इस हार में जीत की अजीब सी ख़ुशी है….
है ना……

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/सी.एम्. शर्मा (बब्बू)….

18 Comments

  1. mani mani 16/09/2016
    • C.M. Sharma babucm 17/09/2016
  2. शीतलेश थुल शीतलेश थुल 16/09/2016
    • C.M. Sharma babucm 17/09/2016
  3. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 16/09/2016
    • C.M. Sharma babucm 17/09/2016
  4. Meena Bhardwaj Meena bhardwaj 16/09/2016
    • C.M. Sharma babucm 17/09/2016
  5. Rajeev Gupta RAJEEV GUPTA 16/09/2016
    • C.M. Sharma babucm 17/09/2016
    • C.M. Sharma babucm 17/09/2016
  6. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 16/09/2016
    • C.M. Sharma babucm 17/09/2016
  7. Kajalsoni 16/09/2016
    • C.M. Sharma babucm 17/09/2016
  8. ALKA ALKA 20/10/2016
    • C.M. Sharma babucm 20/10/2016

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