“अतीत के कोरे पन्ने “

 

रुत भी बदलती है..
हवा की रुख़ भी बदलती है…
कुछ यूँ ही
तह -ब -तह अतीत के कोरे पन्ने
बरसों बाद आज पलटा मैंने। ..
जो राह छोड़ आया था बरसों पहले
उसी राह पर फिर आ खड़ा हूँ उदासी को पहने।
सींचा था जहाँ खुशियों के छोटे पौधे को
आज वहाँ तन्हाई के घने पेड़ है पनपे।
जहाँ सुहानी शाम खूब तफरी किया करती थी
आज वही शाम अपाहिज़ बनी बैठी थी। .
जहाँ चाँद और चकोर के प्यार भरे वर्तालाप से
हुआ करता था पूरा शमा चमकीला
वहाँ आज चाँद था बिल्कुल अकेला। .
अँधेरे का राज था और था बेबस उजाला। .
ठिठोलियां -अटखेलियाँ ये सब पहले की बात थी,
सच तो ये था बस आज वहाँ
इक बेबस लाचार वीरानी -सी रात थी.. ।
रुत भी बदलती है..
हवा की रुख़ भी बदलती है…
कुछ यूँ ही
तह -ब -तह अतीत के कोरे पन्ने
बरसों बाद आज पलटा मैंने।
~अंकिता ~

10 Comments

  1. C.M. Sharma babucm 15/09/2016
    • Ankita Anshu Ankita Anshu 16/09/2016
  2. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 16/09/2016
    • Ankita Anshu Ankita Anshu 16/09/2016
  3. mani mani 16/09/2016
    • Ankita Anshu Ankita Anshu 16/09/2016
  4. शीतलेश थुल शीतलेश थुल 16/09/2016
    • Ankita Anshu Ankita Anshu 16/09/2016
    • Ankita Anshu Ankita Anshu 16/09/2016

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