एक जहाँ और भी है


आसमां के उस पार एक जहाँ और भी है
मंजिल पर है तू मगर, एक राह और भी है
रुकता क्यों है तू अभी से,
तेरी एक चाह और भी है
आसमां के उस पार एक जहाँ और भी है

ख्वाब जो देखे थे तूने
सच वो सारे करदिए
पल वो सारे खुशिओं के
जीवन में अपने भर दिए
आंख क्यों खोलता है अभी से,
तेरा एक ख्वाब और भी है
आसमां के उस पार एक जहाँ और भी है

अंत नही है ये,
नई एक शुरुवात है ये
जीवन के सच से तेरी मुलाक़ात है ये
बैठता क्यों है तू अभी से,
नया एक लक्ष्य और भी है
मंजिल पर है तू मगर एक राह और भी है
आसमां के उस पार एक जहाँ और भी है
20160913_142614


 

5 Comments

  1. C.M. Sharma babucm 15/09/2016
  2. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 16/09/2016
  3. mani mani 16/09/2016

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