एक प्यारा सा एहसास

एक प्यारा सा एहसास

आपके अनुरोध पर कुछ लिखा था
भीतर से विचारों का प्रवाह दिखा था
जो कुछ था एक प्यारा सा एहसास था
विचलन नहीं यह तो परस्पर विश्वास था
कोई कुछ करीब लगे तो ऐसा होता है
कोई क्यों यह माला विचारों की पिरौता है
जहां विचलन सम्भव नहीं यह उम्र का वह पड़ाव है
जाने क्यों लगता है फिर भी आपसे कोई जुड़ाव है
जो ना हुआ कभी ऐसा ही मन हुआ है
किसी के एहसास ने अंतर्मन को छुआ है
इस एहसास को कोई नाम नहीं दें तो अच्छा है
दिल तो दिल है दिल का क्या है दिल तो अभी बच्चा है
इस बच्‍चा दिल को समझाए कोई
इस पर स्‍नेह की बून्दें बरसाए कोई
इस बच्चे की बातों से कहीं आवेश में न आना
नादान है यह तो फिर से इसे समझाना
विचारों की यह उधेडबुन कागज पर आई है
लिखना होगा सार्थक यदि लबों पर हंसी आई है
आपके लबों की मुस्कान प्रेरणा देती है
कलम चलती रहे यूं ही सदा यह कहती है

रामगोपाल सांखला ”गोपी”

6 Comments

  1. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 15/09/2016
  2. mani mani 15/09/2016
  3. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 15/09/2016
  4. babucm babucm 15/09/2016
  5. MANOJ KUMAR MANOJ KUMAR 16/09/2016

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