अब समझौता नहीं

ख़ामोशी की हर वो तार तोड़ दो
जो तुम्हारे इच्छाओ के विरूद्ध जाता हो।
सुकून के उस घनघोर बादल को अपने जीवन की राह में मोड़ लो
जो तुम्हें राहत की बारिश दे जाता हो॥
अपनी आवाज़ क़ो इतना बुलंद करो
कि औरतों पर हुक़्म चलाने वालों की ध्वनि मेँ कंपन पैदा हो..॥
समाज में ऐसे पनपने वाले असामाजिक कीडों को
अपने आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता की जहरीली दवा से मार कर ,
उनको ये एहसास दिला दो कि औरत कोई ख़ामोश और लावारिस खिलौना नहीं।॥।
और गर्जना कर सबको ये बता दो
अब समझौता नहीं……. अब समझौता नहीं।
~अंकिता ~

7 Comments

  1. शीतलेश थुल शीतलेश थुल 15/09/2016
  2. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 15/09/2016
  3. mani mani 15/09/2016
  4. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 15/09/2016
  5. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 15/09/2016
  6. C.M. Sharma babucm 15/09/2016

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