तेरे निशां है कहाँ ?

sheetbhagwaan

  • तेरे पैरो के निशाँ ढूंढते , चलता चला हूँ मैं,
  • इसी उम्मीद में शायद मिल जाये तू कही,
  • रास्ते का पत्थर पीठ में लादे चलता चला हूँ मैं,
  • शायद इसी में तो नहीं तू कही,
  • आसमां की ऊंचाई, समन्दर की गहराई तक,
  • गोता लगा चलता चला हूँ मैं,
  • शायद प्यास बुझाता तू, मिल जाये यही ,
  • जंगलो की ख़ाक छानकर, पर्वतों के शिखर पर चढ़ता चला हूँ मैं,
  • शायद तेरा यहाँ घर तो नहीं !
  • पक्षियों से दोस्ती कर, हवाओं से पूछने लगा हूँ मैं,
  • शायद इन्हें तूने कुछ बताया तो नहीं,
  • मंदिर, मस्जिद, गिरजाघर, पूजा-पाठ वंदना कर,
  • तीर्थ यात्रा पे चलता चला हूँ मैं,
  • अब तो बता दे तू मुझे, मिलेगा भी या नहीं,
  • एक ख़त जो मेरी बेटी ने, तेरे नाम लिखा है,
  • वादा किया है उससे, तुझे साथ लेते आना है…
  • .
  • .
  • शीतलेश थुल 

8 Comments

  1. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 15/09/2016
    • शीतलेश थुल शीतलेश थुल 16/09/2016
  2. Ankita Anshu Ankita Anshu 15/09/2016
    • शीतलेश थुल शीतलेश थुल 16/09/2016
  3. C.M. Sharma babucm 15/09/2016
    • शीतलेश थुल शीतलेश थुल 16/09/2016
    • शीतलेश थुल शीतलेश थुल 16/09/2016

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