बस यूं ही….सी. एम्. शर्मा (बब्बू)…

आराम तो हराम है…
पर आराम भी काम है….

घर समाज की सोच में…
हो गयी सुबह से शाम है…

थक गया हूँ खाली बैठे…
अब करतें थोड़ा आराम है….

ग़ज़ल कविता रचना ये सब…
स्त्रीलिंग पे ही रखे क्यूँ नाम हैं….

जब सब अच्छा सा लिखते हैं…
फिर कचरापेटी का क्या काम है…

सब ढूंढो इसमें मिलके लय ताल …
मेरे लिखे में मेरा क्या काम है……

विनोद करना विनोद का काम है…
विनोद छुट्टी लेके कर रहा आराम है….

बस कर दे अब “बब्बू”, पढ़ के…
सब कर देंगे तेरा काम तमाम है…
\
/सी. एम्. शर्मा (बब्बू)

14 Comments

  1. शीतलेश थुल शीतलेश थुल 15/09/2016
    • C.M. Sharma babucm 15/09/2016
  2. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 15/09/2016
    • C.M. Sharma babucm 15/09/2016
    • C.M. Sharma babucm 15/09/2016
  3. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 15/09/2016
    • C.M. Sharma babucm 15/09/2016
  4. Kajalsoni 15/09/2016
    • C.M. Sharma babucm 15/09/2016
  5. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 15/09/2016
    • C.M. Sharma babucm 15/09/2016
  6. mani mani 15/09/2016
  7. C.M. Sharma babucm 15/09/2016

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