तमन्ना~ए~ज़िन्दगी

तुझ पर विश्वास तो पूरा था मेरी तमन्ना~ए~ज़िन्दगी
जानता न था किस्मत भी दगा दे जाती है,
तुम्हारे प्यार ने मुझे जीना सिखाया था दिल खोलकर
मगर हाथो की लकीरें भी धोखा दे जाती है।
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वफ़ा की उम्मीद और तुमसे
आफ़ताब दिन में न रोशन हो जाए,
बारिश तभी मुमकिन है मेरे दोस्त
जब अश्क़ों के बादल इस मौसम हो जाए

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अजीब है मेरी ज़िन्दगी तुझे मुड़ मुड़ कर देखना
तू मेरी न रही मैं तेरा न रहा
और हमने क्या पा लिया एक दूजे को खोकर
तू तेरी न रही मैं मेरा न रहा।

5 Comments

  1. C.M. Sharma babucm 15/09/2016
  2. शीतलेश थुल शीतलेश थुल 15/09/2016
  3. vinod kumar dave vinod kumar dave 15/09/2016
  4. Kajalsoni 15/09/2016
  5. vinod kumar dave vinod kumar dave 15/09/2016

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