“छलिया 2″……. काजल सोनी

पुरा गोकुल हुआ अंधियारा ,
तू छलिया मुझे छोड़ क्यु गया ।
तेरी अंखियों ने गुलेल सा मारा,
तू छलिया मुझे छोड़ क्यु गया………

रोती है आज ये गइया ,
तरसती है देखने को मैया ।
तू तो था सबके आंख का तारा ,
प्रेम करके फिर किया क्यूं बेसहारा ।
तू छलिया मुझे छोड़ क्यु गया………

याद है तेरा वो गोपियों से लड़ना ,
झूठी बातो में भी तेरा अडना ।
अपनी मुरली की धुन से कर के दीवाना ,
झुठे तूने लूट लिया चैन हमारा ।
ओ छलिया तू मुझे छोड़ क्यु गया…….

आ रही याद तेरी आज बड़ी ,
मै तो रोने लगी खड़ी ही खड़ी ।
सुनी पड़ गई है आज हर गली ,
सुना है यमुना का वो किनारा ।
तू छलिया मुझे छोड़ क्यु गया ………….

पुरा गोकुल हुआ अंधियारा ,

तू छलिया मुझे छोड़ क्यु गया………

 

“काजल सोनी  ”

 

 

18 Comments

    • Kajalsoni 18/09/2016
  1. C.M. Sharma babucm 17/09/2016
    • Kajalsoni 18/09/2016
  2. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 17/09/2016
    • Kajalsoni 18/09/2016
  3. kiran kapur gulati Kiran Kapur Gulatit 17/09/2016
    • Kajalsoni 18/09/2016
  4. Meena Bhardwaj Meena bhardwaj 18/09/2016
    • Kajalsoni 18/09/2016
    • Kajalsoni 18/09/2016
  5. डॉ. विवेक Dr. Vivek Kumar 18/09/2016
    • Kajalsoni 18/09/2016
  6. MANOJ KUMAR MANOJ KUMAR 19/09/2016
    • Kajalsoni 19/09/2016
  7. शीतलेश थुल शीतलेश थुल 19/09/2016
    • Kajalsoni 19/09/2016

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