हैवानियत की हुडदंग – बी पी शर्मा बिन्दु

बादल गरजता है
बिजलियॉ चमकती है
हीम का पत्थर टूटकर
विखर जाता है जहॉ तहॉ
और इस तरह
आकाश रो रोकर
धरती की प्यास बुझाती है
जीने के लिए अम्रित देती है
काश धरती के पाप को
धो लेता
इंसान के दर्द को
टो लेता
ये अनर्थ
जिसका अर्थ नहीं रहता
हैवानियत का हुडदंग
ईश्या क्रोध मोह-माया
लालच
सब के सब
दबे पॉव भाग जाते
शेष रह जाता
प्रेम
सहानुभूति सदविचार
इसके साथ रह जाता
सदभावना
छल कपट से दूर
चैन की सॉस लेता मानव
नहीं देना पडता घूस
नहीं होती काला बजारी
न चोरी से डर रहता
न खून से हाथ रंगा जाता
सिर्फ रह जाता सात रंग
जिससे हम खेलते होली
मनाते दीपावली
दशहरा ईद बकरीद
जाते गुरूद्वारा
गिरिजा घर
मंदिर मस्जिद
सब के सब
अपने रंग में मिश्रित हो जाते
अपने रिवाजों को मानते
सब के सब
आपस में मिल जाते
कर्म और मर्म को
पहचान लेते।

 

Writer             Bindeshwar Prasad Sharma (Bindu)

D/O Birth      10.10.1963

Shivpuri jamuni chack Barh RS Patna (Bihar)

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4 Comments

    • Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar prasad sharma (bindu) 16/09/2016
  1. Kajalsoni 14/09/2016
    • Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar prasad sharma (bindu) 16/09/2016

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