हौड़ में – मुक्तक – डी के. निवातिया

horserace

क्या मिलेगा दौड़कर तुमको घुड़सवारो सी दौड़ में
भुला दोगे खुद ही को दुनिया की इस अंधी होड़ में
आना जाना कुछ कर जाना यही जीवन नियति है
बेहतर होगा पहचान बना, राहे जिंदगी के मौड़ पे !!

 

@——डी. के. निवातिया —-@

22 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 19/09/2016
    • डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 20/09/2016
    • डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 20/09/2016
  2. babucm babucm 19/09/2016
    • डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 20/09/2016
  3. Bharti Das Bharti das 19/09/2016
    • डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 20/09/2016
  4. Dr Swati Gupta Dr Swati Gupta 19/09/2016
    • डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 20/09/2016
  5. Saviakna Savita Verma 19/09/2016
    • डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 20/09/2016
  6. डॉ. विवेक Dr. Vivek Kumar 19/09/2016
    • डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 20/09/2016
  7. Kajalsoni 19/09/2016
    • डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 20/09/2016
  8. Meena Bhardwaj Meena bhardwaj 20/09/2016
    • डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 20/09/2016
  9. Dr Chhote Lal Singh Dr Chhote Lal Singh 20/09/2016
    • डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 20/09/2016
  10. शीतलेश थुल शीतलेश थुल 20/09/2016
    • डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 20/09/2016

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