‘हिंदी दिवस’

आज दिवस है १४ सितम्बर
हिंदी दिवस मनाया है
नेता, अधिकारी हर वर्ग ने
आज हिंदी स्वर लहराया है।

क्या आज का ही मात्र
तारीख-दिन विशेष है
महत्व हिंदी का बताने
क्यों बनते नियम-निर्देश हैं।

क्या माता को ही अपनी
कभी कोई भुला पाया है
कैसे भूल बैठे हिंदी को
क्यों राष्ट्रभाषा बनाया है।

किया गौरवी माता ने तुम्हें
मैंने भी गौरव बढ़ाया है
राष्ट्रपथ पर अग्रसर करके
निज भाषा का वचन निभाया है।

धिक्कारती हूँ मानव तुझे
यूँ ना मेरा तिरस्कार कर
गर, सच्चा सपूत है माता का
तो सच्चे मन से स्वीकार कर।

‘बिजनौरी’ विवशता त्याग दे
स्वीकार मत होकर विवश
जो दिल से तूने मान दिया
तो साकार कल्पना ‘हिंदी दिवस’
तब साकार कल्पना ‘हिंदी दिवस’।।

कवि- कमल ‘बिजनौरी’

8 Comments

  1. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 14/09/2016
    • कमल "बिजनौरी" कमल "बिजनौरी" 14/09/2016
  2. babucm babucm 14/09/2016
    • कमल "बिजनौरी" कमल "बिजनौरी" 14/09/2016
    • कमल "बिजनौरी" कमल "बिजनौरी" 14/09/2016
  3. Kajalsoni 14/09/2016
    • कमल "बिजनौरी" कमल "बिजनौरी" 15/09/2016

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