“एक खत 10″….. काजल सोनी

प्रेमी –
इश्क वो दर्द है ,
जो हर किसी को मिला नहीं ।
मेरे अल्फाज़ क्या कहें तुम्हें ,
कोई शिकवा न कोई गिला नहीं ।
लाख चाहुं मैं तुम्हें अपना बनाने की ,
कितने भी आँसू बहा लु ,
पर तू मुझे कैसे मिले,
खुदा ने जिसे मेरे नशीब में लिखा ही नहीं ।

प्रेमिका –
खुदा ने लिखा वो नशीब मेरा
जिसमें तुम नहीं ,
मिटा दु ऐसी जिदंगी को
तो भी मुझे गम नहीं ।
तेरी यादों को लेकर जो चलती हैं सांस मेरी ,
बिछड़ कर भी मिलेंगे हम,
यु मजबूरियों से न टूटेगी ये आस मेरी ।
मोहब्बत अमर हो जाती हैं उनकी ,
जो साथ नहीं होते ।
किस्मत की लकीरें तो उनकी भी बदल जाती हैं ,
जिनके हाथ नहीं होते । ।

“काजल सोनी “

10 Comments

    • Kajalsoni 14/09/2016
  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 14/09/2016
    • Kajalsoni 14/09/2016
  2. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 14/09/2016
    • Kajalsoni 14/09/2016
  3. Meena Bhardwaj Meena bhardwaj 14/09/2016
    • Kajalsoni 14/09/2016
  4. babucm babucm 15/09/2016
    • Kajalsoni 15/09/2016

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