बिन्दास जवानी ।

आशिक़ थे हम भी कभी, गली-गली था मुकाम हमारा,
पर, देखे नहीं जाते, बिन्दास जवानी के ये मंज़र..!

मंज़र = दृश्य;

मार्कण्ड दवे । दिनांकः १४ सप्टेम्बर २०१६.

bindas-jawani

8 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 14/09/2016
    • Markand Dave Markand Dave 15/09/2016
    • Markand Dave Markand Dave 15/09/2016
  2. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 14/09/2016
    • Markand Dave Markand Dave 15/09/2016
  3. Kajalsoni 14/09/2016
    • Markand Dave Markand Dave 15/09/2016

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