शिक्षा के दोहे—दोहाकार : महावीर उत्तरांचली

दीवाने -ग़ालिब पढो, महावीर यूँ आप
उर्दू -अरबी -फारसी, हिन्दी करे मिलाप // १ .//

शिक्षा -दीक्षा ताक पर, रखता रोज़ गरीब
बचपन बेगारी करे, फूटे हाय नसीब // २. //

पीढ़ी -दर -पीढ़ी गई, हरेक सच्ची बात
अक्षर-अक्षर ज्ञान है, खुशियों की सौगात // ३. //

शिक्षा एक समान हो, एक बनेगा देश
फैला दो सर्वत्र ही, पावन यह सन्देश // ४ . //

जिसमे जितना ज्ञान है, उतना उसका तेज
महावीर फिर ज्ञान से, करता क्यों परहेज // ५ . //

विद्या में हर शक्ति है, हर मुश्किल का तोड़
पुस्तक से मत फेर मुख, शब्द बड़े बेजोड़ // ६. //

अक्षर से कर मित्रता, सच्ची मित्र किताब
तेरे सभी सवाल का, इसके पास जवाब // ७. //

सारी भाषा-बोलियाँ, विद्या का है रूप
विश्व में चहुँ ओर ही, खिली ज्ञान की धूप // ८. //

जीवन ही अर्पित किया, सरस्वती के नाम
उस साधक को यह जगत, झुककर करे प्रणाम // ९. //

पढ़ा-लिखा इन्सान ही, लिखता है तकदीर
अनपढ़ सदा दुखी रहा, कहे कवि महावीर // १०. //

3 Comments

  1. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 14/09/2016
  2. Saviakna Savita Verma 14/09/2016

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