…दिल की आवाज़… (विवेक बिजनोरी)

वो न जाने क्यूँ हर बार मुझे जाता देता है,
मैं कुछ नहीं उसके लिए हर बार दिखा देता है
मैं तो उसकी निगाहों में हमेशा उठना चाहता हूँ,
एक वो जो मुझे अपनी निगाहों में हर बार गिरा देता है

सोचता हूँ के काश वो कभी मुझे अपना समझे,
मैं चाहता हूँ उसकी ख़ुशी इसे न सपना समझे
पर वो की जो मेरी सोच को हर बार हरा देता है,
मैं कुछ नहीं उसके लिए हर बार दिखा देता है

वो न जाने क्यूँ हर बार मुझे जाता देता है,
मैं कुछ नहीं उसके लिए हर बार दिखा देता है

 

विवेक कुमार शर्मा

5 Comments

    • Vivek Sharma Vivek Sharma 14/09/2016
  1. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 14/09/2016
    • Vivek Sharma vivekinfotrend 21/09/2016
  2. Kajalsoni 14/09/2016

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