नये पुष्प


चलते चलते इस राह पर,
नये पग मिल जाएंगे
जीवन में फिर तुम्हारे,
नये पुष्प खिल जाएंगे

जब मेहनत होगी साथ तुम्हारे,
सफलता होगी हाथ तुम्हारे
कामयाबी तुम्हारी देख,
मंजर भी ये हिल जाएंगे
जीवन में फिर तुम्हारे,
नये पुष्प खिल जाएंगे

गिर जो तुम जाओ अगर,
संभलना तुम्हे पड़ेगा
इस राह के हर मोड़ पर,
बदलना तुम्हे पड़ेगा
बढ़ते रहना है तुम्हे,
चाहे पैर ये छिल जाएंगे
जीवन में फिर तुम्हारे,
नये पुष्प खिल जाएंगे

डर डर कर चलना नही कभी,
लंबा है सफर, रुकना नही अभी
तनहा नही तुम इस सफर में,
और भी मुसाफिर मिल जाएंगे
जीवन में फिर तुम्हारे,
नये पुष्प खिल जाएंगे
20160913_142614

https://kumarrahulblog.wordpress.com/


 

6 Comments

  1. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 14/09/2016
  2. Kajalsoni 14/09/2016
  3. C.M. Sharma C.m sharma(babbu) 15/09/2016

Leave a Reply