घर की याद-6

जीवन भर दुख सहा, दुख सहकर
जीवन भर झेली पीड़ा रोकर
जो शांति सुखी को मिलती है
वह मरण शांति हो मेरी

है आज समाप्ति सुख-दुख की
आख़िरी हिचकियाँ ये मेरी
है आज रुदन का अंतिम दिन
आख़िरी सिसकियाँ ये मेरी

Leave a Reply