विजयदिवस (KARGIL WAR 1999)—महावीर उत्तरांचली

धन्य हमारी मातृभूमि;
धन्य हमारे वीरवर।
लौट आये कालमुख से;
शत्रू की छाती चीरकर।।

बढ़ चले विजयनाद करते;
काल को परास्त कर।
रीढ़ शत्रू का तोड़ आये;
वज्र मुश्त प्रहार कर।।

पीछे न हट सके वो पग;
जब काल का प्रण किया।
रणबांकुरों ने ऐसे हँसके;
मृत्यु का वरण किया।।

7 Comments

  1. डॉ. विवेक Dr. Vivek Kumar 13/09/2016
  2. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 13/09/2016
  3. Kajalsoni 13/09/2016
  4. babucm babucm 13/09/2016
  5. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 13/09/2016
  6. Mahavir Uttranchali MAHAVIR UTTRANCHALI 14/09/2016

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