पाँव—कवि: महावीर उत्तरांचली

पाँव थककर भी
चलना नहीं छोड़ते
जब तक वे
गंतव्य तक न पहुँच जाएँ …
थक जाने पर कुछ देर
राह में विश्राम कर
पुन: चल पड़ते हैं
अपने लक्ष्य की और …

जबकि
घोड़े के रथ पर सवार लोग
या फिर इंधन से चलायमान
अत्याधुनिकतम गाड़ियों में बैठे लोग
बिना पहियों के
अगले पडाव तक नहीं पहुँच पाते …

मगर
पाँव सदियों से
यात्रा करते आये हैं
कई सभ्यताओं
और संस्कृतियों की दास्ताँ कहते !!!

One Response

  1. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 13/09/2016

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