दुर्मिल सवैया :– चितचोर बड़ा बृजभान सखी (भाग -1)

दुर्मिल सवैया :–
चितचोर बड़ा बृजभान सखी !! भाग -1
मात्रा-भार :–
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!! 1 !!
सुन भानु मुंडेर चढ़ा अब तो
नव ज्योति उठी पहचान सखी !

सब काग-विहाग उड़े उर के
मन गावत है प्रिय गान सखी !

हिय को हिलकोर गया अब जो
लगता मुझको प्रतिमान सखी !

नित रोज़ सरोज खिले मन में
इक आनंद सा अनजान सखी !!

!! 2 !!
सुधि मोहि नहीँ अपने तन की
कुछ आवत ना अब ध्यान सखी !

भयभीत बड़ी विपदा उमड़ी
यह रोग लगे बलवान सखी !

मन मार लियो तन थाम लियो
चित चंचल चाह उड़ान सखी !

प्रभु नाम जपूँ शुभ काम करुं
नहीँ भात मुही जलपान सखी !

!! 3 !!
मनमोहन सा मनमोहक सा
उर में बसगौ मेहमान सखी !

सब श्याम लगै सब श्याम दिखै
सपने करूँ श्याम बयान सखी !

सुन राग मुराद भरी अब तो
कर कौनु उपाय निदान सखी !

कुछ औषधि दे नहिं वैद बुला
जिय मा सुलगै अब प्राण सखी !

कवि :– अनुज तिवारी “इन्दवार”