रातभर तुम्हारे बारे मे लिखा मैने

उस रात नीद नही आ रही थी,
कोशिश थी भुला के तेरी यादे बिस्तर को गले लगा सो जाऊ
पर कम्बख़्त तू थी जो कहीं नही जा रही थी||

नीद की खातिर २ जाम लगाए,
सोचा कि सोने के बाद हमारी बातो को मै कागज पर उतारूँगा
एक कागज उठा सिरहाने रख कर मे सो गया||

रातभर तुम्हारे बारे मे लिखा मैने
सुबह उठा तो थोड़ा परेशान हुआ क़ि गुफ्तगू के निशान गायब
शायद, शब्द सारी रात आँसुओ से धुलते रहे ||

वो गीले कागज मैने संजोए रखे
क्योकि अगर मिली तुम मुझको कागज दिखाकर के पूछना है
क्या बात करते थे हम, आज तो बता दो ||

12 Comments

  1. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 13/09/2016
    • shiv dutt shrotriya 13/09/2016
  2. Kajalsoni 13/09/2016
    • shiv dutt shrotriya 13/09/2016
  3. Saviakna Saviakna 13/09/2016
    • shiv dutt shrotriya 13/09/2016
  4. C.M. Sharma babucm 13/09/2016
    • shiv dutt shrotriya 13/09/2016
    • shiv dutt shrotriya 13/09/2016
  5. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 13/09/2016
    • shiv dutt shrotriya 13/09/2016

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