“एक खत 9″……काजल सोनी

प्रेमी –
यू दुर जाने से तेरे ,
दर्द इतना है इस दिल में मेरे।
कि धड़कन भी साथ देने से घबरा गई ,
तुम्हें प्यार करते करते,
ये आदत हो गई मेरी ,
कि बंद आँखों से अब तो मौत भी धोखा खा गई ।

प्रेमिका –
दुर जाने का गम मुझे भी कुछ यूं सताता हैं ,
कोसो दुर रहकर भी ,
दिल तुझे ही पाता है ।
तुम्हारी चाहत की कशिश में ,
मौत से नहीं हम जिंदगी से डरते हैं ,
बिन तेरे जीना न पड़े ,
यही सोच कर हम तो हर रोज मरते हैं ।।

“काजल सोनी “

8 Comments

  1. शीतलेश थुल शीतलेश थुल 13/09/2016
    • Kajalsoni 14/09/2016
  2. C.M. Sharma babucm 13/09/2016
    • Kajalsoni 14/09/2016
    • Kajalsoni 14/09/2016
  3. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 13/09/2016
  4. Kajalsoni 14/09/2016

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