शांत रहिये पार्ट -3

शांत रहिये, शांत रहिये
यह शब्द क्यों चुभने लगे है आज कल ,
क्या शांत रहने के लिए ही ,
ईश्वर ने दी थी जुबान।

क्या यह मेरी गलती थी कि घर की बड़ी से ,
ससुराल में सबसे छोटी बनना पड़ा ,और अभी ,
छोटा बनने का प्रयास ही कर रही थी कि ,
अचानक ही सारी जिम्मेदारियो के साथ ,
मुझे फिर से बड़ा भी बना दिया गया।

इस बड़े से छोटा और फिर छोटे से बड़ा बनने की ,
प्रक्रिया में मेरा बचपन तो कही खो ही गया.
उस खोए हुए बचपन को ,
फिर से जी तो लेने दो ,
फट गया है मनमें जो ,
उसको सी तो लेने दो।

मन में भरा है वह सब कुछ ,
एक बार कहना चाहतीं हूँ ,
मरने के पहले फिर से ,
एक बार जीना चाहतीं हूँ।

पर हर बार तुम मुझे यूँ ,
शांत क्यों करा देते हो ?

 

हो जाऊंगी शांत बिलकुल ही ,
बस मुझे कुछ दिन अपने मन की ,
कर लेने दो ,मन के टूटे मोती को ,
माला  में  पिरो लेने दो।

मन में जो कुछ सब , वह ,
आज मूझे कह तो लेने दो ,
मरने से पहले मुझे ,बस एक बार ,
पूरे मन से जी तो लेने दो।

 

 

 

10 Comments

  1. babucm babucm 12/09/2016
    • Manjusha Manjusha 12/09/2016
  2. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 13/09/2016
    • Manjusha Manjusha 13/09/2016
  3. Kajalsoni 13/09/2016
    • Manjusha Manjusha 13/09/2016
    • Manjusha Manjusha 15/09/2016
  4. mani mani 13/09/2016
    • Manjusha Manjusha 15/09/2016

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