घुटन

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कही बिखरा पड़ा ये शब्द घुटन
कानो मे आ पड़ा …..
तब सोचा घुटन से इसांन
निष्क्रिय हो जाता होगा
पर जब घुटन ने ही दिल मे
ढेरा जमा लिया तो जाना
घुटन घुटन मे घुटते घुटते ही
सब काम निपटा लेती है
जब सब निपट जाता हैं तो भी
सब कुछ अधूरा मन ही मन
दिल को कचोटता है
ये सारा दुख
तह बन कर खुद पर ही
आके जम जाता हैं
इतना भी क्या कठोर
हो जाता है ह्रदय
की सब कुछ चुप
चाप सहता हैं
और जब कठोर
हो ही गया हैं
तो अकेले में फिर
आंसू बन कर क्यू
बहती हैं ये घुटन….

कपिल जैन

9 Comments

  1. C.M. Sharma babucm 12/09/2016
  2. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 13/09/2016
    • कपिल जैन कपिल जैन 13/09/2016
  3. Kajalsoni 13/09/2016
    • कपिल जैन कपिल जैन 13/09/2016
    • कपिल जैन कपिल जैन 13/09/2016
  4. mani mani 13/09/2016
    • कपिल जैन कपिल जैन 13/09/2016

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