कुछ दिल की”””” “”””” सविता वर्मा

पेड़ के नीचे बैठे तुम निहारा करो ये इन्तजार जियादा था,
ना कोई वादा ना कोई कसम फिर भी एतबार जियादा था
रूक जाती थी कलम तुम्हे खत लिखने में
मन बेइमान को पर तुम्हारे खत का इन्तजार जियादा था।।
सविता वर्मा

6 Comments

  1. babucm babucm 13/09/2016
  2. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 13/09/2016
  3. शीतलेश थुल शीतलेश थुल 13/09/2016
  4. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 13/09/2016
  5. Saviakna Saviakna 13/09/2016

Leave a Reply