“प्यारी बहना” (बाल कविता)…. काजल सोनी

मेरी हैं एक प्यारी बहना ,
बुरा कभी न उसको कहना।
एक लम्बी सी चोटी है ,
और थोड़ी सी मोटी हैं ।
छिन झपट कर खाये खजाना ,
ले लेती हैं सारे खिलौना ।
मेरी हैं एक प्यारी बहना ,
बुरा कभी न उसको कहना ।

तोता उसको भाता हैं ,
जो गाजर मिर्ची खाता है ।
बिल्ली से वो चिढती हैं ,
सब से देखो वो लडती हैं ।
आता नहीं है उसको सहना ,
मेरी हैं एक प्यारी बहना ,
बुरा कभी न उसको कहना ।

मम्मी की वो प्यारी है ,
और पापा की दुलारी है ।
दादा दादी की आँख का है तारा,
रह जाता हूँ मैं ही बेचारा ।
दौड़ दौड़ के खेले हैं ,
मन जो चाहे ले ले हैं ।
प्यारी प्यारी उसकी सहेली ,
नाचे देखो छैल छबिली।
बिन उसके मुझको नहीं रहना ,
मेरी हैं एक प्यारी बहना ,
बुरा कभी न उसको कहना । ।

“काजल सोनी “

14 Comments

  1. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 13/09/2016
    • Kajalsoni 13/09/2016
  2. C.M. Sharma babucm 13/09/2016
    • Kajalsoni 13/09/2016
  3. Markand Dave Markand Dave 13/09/2016
    • Kajalsoni 13/09/2016
  4. शीतलेश थुल शीतलेश थुल 13/09/2016
    • Kajalsoni 13/09/2016
    • Kajalsoni 13/09/2016
    • Kajalsoni 13/09/2016
  5. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 13/09/2016
  6. Kajalsoni 13/09/2016

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