जल की समस्या – अनु महेश्वरी

कहीं बाढ़, कहीं सूखा,
हो रही फसलें बर्बाद,
वजह पानी ही बनता,
कम हो या ज़्यादा |

काश जोड़ पाते हम,
सारी नदियों को।
जरुरत जहाँ,
बहाते पानी वहाँ।
न पीने के पानी की होती किल्लत,
न कही होता सूखा,
न आती बाढ़।
न बनता पानी,
कलह की वजह।
न दूरिया आती दिलों में,
पानी की वजह।
खेतों में होती,
लहलहाती फसलें।
किसान भी देश का,
बदहाल न होता।

‘अनु महेश्वरी’
चेन्नई

12 Comments

  1. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 13/09/2016
    • ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 13/09/2016
  2. C.M. Sharma babucm 13/09/2016
    • ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 13/09/2016
  3. डॉ. विवेक Dr. Vivek Kumar 13/09/2016
    • ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 13/09/2016
  4. Kajalsoni 13/09/2016
    • ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 13/09/2016
  5. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 14/09/2016
    • ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 14/09/2016
    • ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 14/09/2016

Leave a Reply