ज़िंदगी ।

आख़िर, नुमाइश को भी, गले लगा ही लिया,
अपनी ज़िंदगी को, रोते न देख सका मैं…!

नुमाइश = पाखंड, तमाशा, दिखावा;

मार्कण्ड दवे । दिनांकः २९ जून २०१६.

zindagi

4 Comments

  1. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 12/09/2016
    • Markand Dave Markand Dave 13/09/2016
  2. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 12/09/2016
    • Markand Dave Markand Dave 13/09/2016

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