बाल कविता(चौपई छंद)

तोता दिन भर जपता नाम
रघुपति राघव राजा राम
आगन्तुक को करे प्रणाम
संग पपीता खाता आम।।

बंदर मामा करते शोर
दौड़ लगाते चारो ओर
बागों को देते झकझोर
देख भागते जैसे चोर।।

बिल्ली मौसी हैं बदनाम
करे दूध का काम तमाम
घात लगा कर सुबहो शाम
चूहें पहुँचाती सुर धाम।।
!!!
!!!
सुरेन्द्र नाथ सिंह ‘कुशक्षत्रप”

(छंद विधान: चौपई छंद में 15-15 मात्राओ के सम मात्रिक चार चरण के साथ साथ अंत में गुरु-लघु आवश्यक। यह चौपाई छंद से अलग छंद विधा है)

18 Comments

  1. कपिल जैन कपिल जैन 12/09/2016
    • सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 12/09/2016
  2. डॉ. विवेक Dr. Vivek Kumar 12/09/2016
    • सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 12/09/2016
  3. C.M. Sharma babucm 12/09/2016
    • सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 12/09/2016
  4. Kajalsoni 12/09/2016
    • सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 12/09/2016
  5. Meena Bhardwaj Meena bhardwaj 12/09/2016
    • सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 12/09/2016
  6. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 12/09/2016
    • सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 12/09/2016
  7. शीतलेश थुल शीतलेश थुल 12/09/2016
    • सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 12/09/2016
  8. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 12/09/2016
    • सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 12/09/2016
  9. Anju Singh 23/09/2016
  10. Kumar Gaurav 23/09/2016

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