आजकल ।

फ़ाक़ामस्ती के दिन आ गए, आजकल इश्क में,
छोड़ दिया, दिल को बहलाना, आजकल इश्क में…!

फ़ाक़ामस्ती = बेफ़िक्री;
बहलाना = दिलासा देना;

मार्कण्ड दवे । दिनांकः ११ जून २०१६.

aajkal

6 Comments

  1. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 11/09/2016
    • Markand Dave Markand Dave 12/09/2016
  2. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 11/09/2016
    • Markand Dave Markand Dave 12/09/2016
  3. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 12/09/2016
    • Markand Dave Markand Dave 13/09/2016

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