नशे की लत – शिशिर मधुकर

पेड़ कैसा भी हो तूफानों में हिल जाता है
बहारे साथ जब देती हैं तो खिल जाता हैं

प्रेम पाने को यहाँ जो भी बेकरार रहते हैं
समय आने पे उन्हे यार भी मिल जाता हैं

घाव सीनों पे दोस्तों के ऐसे मत छोड़ो
ये आँचल नहीँ जो फट के सिल जाता हैं

ख़ंज़र लग जाए तो सीने से लहू बहता हैं
कड़वी बातों से हर अंग अंग छिल जाता हैं

नशे की लत को यहाँ कोसने से क्या होगा
पीने वालों को ये हर जगह मिल जाता हैं

शिशिर मधुकर

15 Comments

  1. mani mani 10/09/2016
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 10/09/2016
      • mani mani 10/09/2016
  2. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 10/09/2016
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 10/09/2016
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 10/09/2016
  3. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 10/09/2016
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 10/09/2016
  4. Meena Bhardwaj Meena bhardwaj 10/09/2016
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 10/09/2016
  5. babucm C.m sharma(babbu) 10/09/2016
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 10/09/2016
  6. Kajalsoni 12/09/2016
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 12/09/2016

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