गुरु पर मुक्तक

कभी जल्दी आते है, कभी देर से आते है

हर बार होती है हमारी मस्ती वह आ जाते है

यह है गुरु नामक दीपक जिसे शिष्य को मिलता पाठ

कभी तो किताब का पाठ तो कभी बहार का पाठ समझाते है

कवि: स्मित परमार

आणंद गुजरात

3 Comments

  1. mani mani 10/09/2016
  2. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 10/09/2016

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