दूर इंसा जब करेगा खामियाँ

गजल (बह्र 2122 2122 212) गैर मुरद्द्फ़ गजल

दूर इन्साँ जब करेगा खामियाँ
तब दिखेंगी आप ही अच्छाइयाँ।।

आम जन की है मुसीबत मुफलिसी
खत्म होती ही नहीं दुश्वारियाँ।।

चोर नेता बन के लूटें देश को
जानते है इनकी हम अय्यारियाँ।।

गर निशा हो घोर विपदा से भरी
छोड़ देती साथ भी परछाईयाँ।।

धूप दुख और छाँव सुख है जिन्दगी
जो इसे जाने वो जीते बाजियाँ ।।

मशविरे देते ज़माने को बहुत
मारते खुद गर्भ में वो बेटियाँ।।

वक्त ने सौदा किया है इस तरह
तज़्रिबा दे, ले गया नादानियाँ।।

दौर रिश्तो में गिरावट का बढ़ा।
टूटती है रोज़ ही कुछ शादियाँ।।
!!!
!!!
सुरेन्द्र नाथ सिंह ‘कुशक्षत्रप’

14 Comments

    • सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 09/09/2016
  1. C.M. Sharma babucm 09/09/2016
    • सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 09/09/2016
  2. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 09/09/2016
    • सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 09/09/2016
  3. Meena Bhardwaj Meena bhardwaj 09/09/2016
    • सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 09/09/2016
  4. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 09/09/2016
    • सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 09/09/2016
    • सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 09/09/2016
  5. Dr Swati Gupta Dr Swati Gupta 10/09/2016
    • सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 22/09/2016

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