गज़ल :– तू ले चल मुझे मैं जहां चाहता हूँ !!

ग़ज़ल :– ले चल मुझे मैं जहाँ चाहता हूँ !!
बहर :– 122-122-122-122 !!

हसीं भोर रंगी समा चाहता हूँ !
तु ले चल मुझे मैं जहां चाहता हूँ !!

ज़रा देर कर दी सँवरने में मैंने !
तो इसके लिये मैं क्षमा चाहता हूँ !!

मैं मज़हब के दंगों से रोया बहुत हूँ !
समां आज फ़िर खुशनुमा चाहता हूँ !!

मेरा देश असहाय बूढ़ा हुआ अब !
मैं फ़िर आज होना जवां चाहता हूँ !!

फ़लक सी यहां अब रोशन जमीं हो !
चमकते सितारे यहां चाहता हूँ !!

तेरे इस मनचले जिगर का मुझे क्या ?
सदा मैं तेरी आतमा चाहता हूँ !!

यहाँ डस रहा जो हमारी तपन को !
अँधेरों का अब खातमा चाहता हूँ !!

अनुज तिवारी “इन्दवार”

10 Comments

  1. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 08/09/2016
    • डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 08/09/2016
    • anuj 13/09/2016
  2. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 08/09/2016
  3. Meena Bhardwaj Meena bhardwaj 08/09/2016
  4. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 09/09/2016
  5. C.M. Sharma babucm 09/09/2016
  6. kiran kapur gulati kiran kapur gulati 10/09/2016

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