नजरो को कैसे चुरायेगा—-(डी. के. निवातियाँ)

हे मानुष कर ले मनमानी
एक दिन खुद पछतायेगा
रे जैसे करम करेगा प्राणी
फल वैसा ही यंहा पायेगा !!

आज नहीं तो कल ही सही हे मानव
सब कुछ नजरो के सामने आयेगा !
जब चल रहा होगा कर्मो का चलचित्र
फिर खुद से नजरो को कैसे चुरायेगा !!

खूब चढ़ा लो रुपया पैसा और हार  
धन दौलत से ना खुश कर पायेगा
ईश्वर के बही-खाते  है बड़े निराले
वहां आत्मचिंतन ही काम आयेगा !!

दुनिया के इस क्षीर सागर में
मात्र सत कर्म की नाव चले है !
एक तेरी करनी के कर्मफल से
इसमें झूठ सच की लहर हिले है !!

किस कारण से दुनिया में आये
जिस दिन यह भान हो जायेगा !
पर लगेगी तेरे जीवन की नैया
यहां पे आना सफल हो जायेगा !!

हे मानुष कर ले मनमानी
एक दिन खुद पछतायेगा
रे जैसे करम करेगा प्राणी
फल वैसा ही यंहा पायेगा !!

!
!!

!!!

डी. के. निवातियाँ___@@@

 

 

 

10 Comments

  1. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 27/09/2016
  2. Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar prasad sharma 27/09/2016
  3. mani mani 27/09/2016
  4. babucm babucm 27/09/2016
  5. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 27/09/2016
  6. Tishu Singh Tishu Singh 28/09/2016
  7. Tishu Singh Tishu Singh 28/09/2016
  8. Meena Bhardwaj Meena Bhardwaj 28/09/2016
  9. Dr Swati Gupta Dr Swati Gupta 28/09/2016

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