दर्दे दिल

गैरों से नहीं हमको तो,
अपनों से दर्द मिला है,
सितम जो हुए थे हम पर,
उसका सिर्फ गवाह खुदा है,
जख्म दिखता नही है,
पर नासूर ये दिल का बना है,
दर्द ऐसा उठा इस दिल में,
रूह भी अब रोने लगी है,
सैलाव उठा है जो दिल में,
आँखों से बरसता है,
दफन किया था हमने इस दर्द को,
दिल के किसी एक कोने में,
फिर भी न जाने क्यों ये आँसू,
मेरी इतनी परवाह करता है
मेरे दर्दे दिल की दास्तां को,
सरे आम वयां करता है।।
By:Dr Swati Gupta

13 Comments

  1. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 08/09/2016
    • Dr Swati Gupta Dr Swati Gupta 10/09/2016
  2. C.M. Sharma C.m sharma(babbu) 08/09/2016
    • Dr Swati Gupta Dr Swati Gupta 10/09/2016
  3. शीतलेश थुल शीतलेश थुल 08/09/2016
    • Dr Swati Gupta Dr Swati Gupta 10/09/2016
  4. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 08/09/2016
    • Dr Swati Gupta Dr Swati Gupta 10/09/2016
  5. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 08/09/2016
    • Dr Swati Gupta Dr Swati Gupta 10/09/2016
    • Dr Swati Gupta Dr Swati Gupta 10/09/2016
  6. Dharitri Dharitri 23/09/2016

Leave a Reply