शायरी

शायरी

१. मेरे दिल मे उसकी फिक्र आज भी है
हालाँकि उसको मेरी खुदा से दुआ का शक आज भी है
बहुत बार हमारी आँखें हुई आमने-सामने
उस आँखों मे मोहब्बत का इंतजार आज भी है

२. जब हमारी आँखें आमने-सामने होती है
पता नहीं तेरा दिल क्या समझता है?
पर जब हमारी आँखें आमने-सामने होती है
मेरा दिल मोहब्बत जरूर समझता है

कवि: स्मित परमार
आणंद गुजरात

3 Comments

  1. C.M. Sharma babucm 07/09/2016
  2. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 08/09/2016

Leave a Reply