…तेरे बिन …. (विवेक बिजनोरी)

तेरे बिन ऐसे जिए जा रहा हूँ,
जैसे खुद पे सितम मैं किये जा रहा हूँ
तेरी कमी अब भी खलती है दिल को,
अश्को को अपने पिए जा रहा हूँ

तेरे बिन ऐसे जिए जा रहा हूँ,
जैसे खुद पे सितम मैं किये जा रहा हूँ

हर एक याद दिल को दुखाती है तेरी,
हर शाम फिर याद लाती हैं तेरी
धोखा सा खुद को दिए जा रहा हूँ

तेरे बिन ऐसे जिए जा रहा हूँ,
जैसे खुद पे सितम मैं किये जा रहा हूँ

मुझको पता है तू भी ना भूलेगा मुझको,
सपनो में आकर के छू लेगा मुझको
इसी उम्मीद से आँखें बंद किये जा रहा हूँ

तेरे बिन ऐसे जिए जा रहा हूँ,
जैसे खुद पे सितम मैं किये जा रहा हूँ

विवेक कुमार शर्मा

10 Comments

  1. Vivek Sharma vivekinfotrend 07/09/2016
  2. Kajalsoni 07/09/2016
  3. Vivek Sharma Vivek Sharma 07/09/2016
  4. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 07/09/2016
    • Vivek Sharma vivekinfotrend 21/09/2016
  5. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 07/09/2016
    • Vivek Sharma vivekinfotrend 21/09/2016
  6. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 08/09/2016
    • Vivek Sharma vivekinfotrend 21/09/2016

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