कभी यूँही

कभी यूँही तो मिला करो
कभी यूँही तो मिला करो
वजह तो लाखों होती है… पर
कभी बेवजह ही मिला करो
कभी यूँही तो मिला करो !!!

कुछ बातें तुमसे करनी हैं
कुछ हाल तुम्हारे लेने हैं
बात ही न सही कभी चुपचाप ही तुम मिला करो
कभी यूँही तो मिला करो !!!

काफी अरसा बीत गया
पास तुम्हारे बैठेंगे,
बातें जो तुम छिपाते हो वो बातें तुमसे पूछेंगे
झूठे तो तुम होंगे शायद, पर ये आँखें सच ही कहती हैं
चाहे लब न खोलो तुम,ये आँखें खोले रखा करो
हर पल गुमसुम क्यों रहते हो, कभी तुम भी तो खिला करो
कभी यूँही तो मिला करो
कभी यूँही तो मिला करो !!!

राहुल

8 Comments

  1. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 07/09/2016
  2. babucm babucm 07/09/2016
  3. Kajalsoni 07/09/2016
  4. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 07/09/2016

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