जब हम तुम मिलजाते हैं

हसदेते हो तुम अगर, फूल ये सब खिलजाते हैं
तब फूल भी ये मुस्काते हैं, जब हम तुम मिलजाते हैं
हवाएं चलने लगती हैं, फ़िज़ाएं बहने लगती हैं
आकाश सारा सजता है, जब हम तुम मिलजाते हैं

वो बातें तेरी, वो साथ तेरा
वो बाहें तेरी, वो हाथ तेरा
हाथ जो तुम थामो अगर, मन ही मन मुस्कातें हैं
तब मन में क्या क्या होता है तुम्हे बता न पाते हैं
खुश बहुत होता हूँ तब, जब हम तुम मिलजाते हैं

वो जाना तेरा, वो आना तेरा
इठलाना तेरा, शर्माना तेरा
शर्मा जो तुम जाओ अगर, संग ही संग शरमाते हैं
निशां हमारे क़दमों के हर जगह ही हम पाते हैं
हाल मेरा तब क्या होता है तुम्हे बता न पाते हैं
खुश बहुत होता हूँ तब, जब हम तुम मिलजाते हैं

राहुल

4 Comments

  1. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 07/09/2016
  2. babucm babucm 07/09/2016
  3. Kajalsoni 07/09/2016

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