इसी जनम (गजल)

मुहब्बत कीजिए या न कीजिए एक करम कीजिए.
इन्कार भी हस कर कीजिए इतना तो करम कीजिए..

क्या पता वक्त बेवक्त नाचीज काम आ जाए..
ऐ मगरूर हसी नफरत तो जरा कम कीजिए..

दिल मे किसी गैर को भले ही सजाइये..
कदमो मे रहने दीजिये इतना तो रहम कीजिये..

नजरो मे रहने दीजिये गुस्सा भी जरा पीजिये..
फूल है आप गुलशन के रूख जरा नरम कीजिए..

फूल है आप गुलशन के रूख जरा नरम कीजिए..
कुछ भी कीजिए ऐ मह्जबी, इसी जनम कीजिए..

2 Comments

  1. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 07/09/2016
  2. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 07/09/2016

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