यही हैं नाग वो तक्षक

कौमी एकता दल का सपा में विलय——

न हैं सेवक प्रजा के ये न हैं कानून के रक्षक
बिठाकर गोद में रक्खे हैं आदमखोर नरभक्षक
नहीँ ढूंढो कभी बिल में, नहीँ ढूंढो अरण्यों में
पुराणों में पढे हैं जो यही हैं नाग वो तक्षक

कवि देवेन्द्र प्रताप सिंह “आग”
9675426080

Leave a Reply